नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है। राष्ट्रपति द्वारा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार करने के तुरंत बाद ही प्रल्हाद जोशी के नाम की घोषणा कर दी गई।
शिक्षा मंत्रालय का प्रभार प्रल्हाद जोशी को क्यों दिया गया?
शिक्षा पोर्टफोलियो किसी भी सरकार के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए इसे लंबे समय तक खाली नहीं छोड़ा जा सकता था। प्रल्हाद जोशी पहले से ही केंद्रीय मंत्री हैं और कर्नाटक से आते हैं। उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार (additional charge) दिया गया है।
विपक्ष क्या रुख अपनाएगा?
हालिया मिली न्यूज के अनुसार, राहुल गांधी और विपक्षी दल पहले ही कह चुके हैं कि धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से पूरी तरह हटाया जाना चाहिए और किसी अन्य मंत्रालय में नहीं रखा जाना चाहिए। अब देखना होगा कि विपक्ष इस नई नियुक्ति पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
हाल ही में NTA के नए प्रमुख की नियुक्ति पर भी विपक्षी सदस्यों ने भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई थी। ऐसे में अब सभी को इंतज़ार है कि विपक्ष इस बार क्या रुख अपनाता है।
आने वाले दिनों में क्या उम्मीद करें?
एक हालिया न्यूज में बताया गया है कि सोमवार को विपक्ष की ओर से और अधिक तीखी प्रतिक्रियाएँ आ सकती हैं। विपक्ष यह कह सकता है कि उनकी जीत सही साबित हुई है और वे सरकार पर और दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। वे अब गृह मंत्री को भी घेरने की कोशिश कर रहे हैं और प्रधानमंत्री से माफी माँगने की माँग कर रहे हैं।
विपक्ष का मानना है कि मोदी सरकार बैकफुट पर है और यह सही समय है उन्हें और पीछे धकेलने का। वे यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि सरकार में कुशासन (misgovernance) हो रहा है और इसके लिए सरकार को जवाबदेह ठहराया जाए।
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