लेखक का नोट: यह लेख 9to5Google (Abner Li, 1 May 2026) की मूल रिपोर्ट पर आधारित है। COSMO एक experimental AI assistant ऐप था, जो गलती से Play Store पर लाइव हुआ और बाद में हटा दिया गया। यहाँ दी गई सभी जानकारी उसी रिपोर्ट पर आधारित है।
परिचय
दोस्तों, कल्पना कीजिए – आप सुबह उठते हैं, फोन हाथ में लेते हैं, और बिना कोई ऐप खोले, बिना कुछ टाइप किए – आपका फोन आपकी ज़रूरतें खुद ही पूरी करने लगता है। आपको याद दिलाता है कि आज मीटिंग है, आपकी पुरानी तस्वीरें ढूंढकर दिखा देता है, किसी मुश्किल शब्द का मतलब बता देता है, और आपकी बातचीत का सारांश भी तैयार कर देता है। यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म का सीन नहीं है – यह था COSMO।
हाल ही में Google ने एक नया Experimental AI Assistant ऐप ‘COSMO’ को Play Store पर लाइव किया था। हालाँकि यह जल्दी ही हटा दिया गया, लेकिन इसने टेक्नोलॉजी जगत में धमाल मचा दिया। सवाल उठने लगे – आखिर यह COSMO क्या है? यह Gemini से कैसे अलग है? क्या यह हमारे फोन इस्तेमाल करने का तरीका बदल देगा? क्या यह सुरक्षित है?
इस आर्टिकल में हम हर सवाल का जवाब देंगे – बिल्कुल सरल, मानवीय और मजेदार अंदाज में।
COSMO क्या है? पूरी जानकारी
COSMO का फुल फॉर्म है – Conversational Search and Mobile Orchestration। लेकिन इतने लंबे नाम से परेशान न हों। इसे समझने के लिए दो शब्द काफी हैं – “स्मार्ट सहायक”। लेकिन यह उन स्मार्ट सहायकों से कहीं ज़्यादा स्मार्ट है जिन्हें आप अब तक इस्तेमाल करते आए हैं।
9to5Google की रिपोर्ट के अनुसार, यह ऐप Google Research की तरफ से बनाया गया था। इसका Play Store पर पैकेज नाम था – com.google.research.air.cosmo। यानी यह कोई थर्ड पार्टी ऐप नहीं, बल्कि खुद Google के रिसर्च डिपार्टमेंट का प्रोजेक्ट था। जब यह ऐप Play Store पर आया, तो टेक जगत में हड़कंप मच गया। लोगों ने सोचा – क्या Google कोई नया AI असिस्टेंट लॉन्च कर रहा है? क्या यह Gemini को रिप्लेस करेगा?
लेकिन बाद में पता चला कि यह एक एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट था – यानी प्रयोगशाला में बनाया गया एक टेस्ट ऐप। यह आम लोगों के लिए नहीं था।
COSMO कैसे काम करता था?
आम AI असिस्टेंट्स (जैसे Siri, Alexa, या पुराना Google Assistant) आपकी वॉइस कमांड सुनते हैं, उसे क्लाउड पर भेजते हैं, वहाँ प्रोसेस करते हैं, और फिर जवाब देते हैं। इसमें इंटरनेट होना बहुत ज़रूरी है। बिना इंटरनेट के ये असिस्टेंट बेकार हो जाते हैं।
लेकिन COSMO कुछ अलग था। COSMO आपके फोन के अंदर ही (on-device) काम करता था। इसका साइज़ करीब 1.13 GB था, क्योंकि इसमें Gemini Nano मॉडल लोकली इंस्टॉल किया गया था। मतलब – बिना इंटरनेट के भी यह कई काम कर सकता था।
यही इसकी सबसे बड़ी खासियत थी। जब आपके पास इंटरनेट न हो, तब भी COSMO आपकी मदद कर सकता था – अलार्म लगाना, मैसेज भेजना, नोट्स बनाना, पुरानी तस्वीरें ढूंढना, यहाँ तक कि कुछ हद तक सवालों के जवाब देना भी।
COSMO ने कौन से परमिशन माँगे?
जब आप COSMO इंस्टॉल करते, तो यह कई सिस्टम परमिशन माँगता था। ये परमिशन इसलिए ज़रूरी थे ताकि ऐप सही से काम कर सके। आइए जानते हैं कौन-कौन से परमिशन थे:
सबसे पहला परमिशन था – स्क्रीन एक्सेस। यानी COSMO आपके फोन की स्क्रीन देख सकता था। इससे वह समझ पाता था कि आप किस ऐप पर हैं, क्या देख रहे हैं, और उस हिसाब से मदद कर पाता था।
दूसरा परमिशन था – वॉइस मैच। यानी COSMO सिर्फ आपकी आवाज़ पर ही एक्टिव होता था। अगर कोई और बोलता, तो वह रिस्पॉन्ड नहीं करता था। इससे प्राइवेसी को बहुत फायदा होता था।
तीसरा परमिशन था – नोटिफिकेशन एक्सेस। यानी COSMO आपके आने वाले मैसेज और अलर्ट पढ़ सकता था। इससे वह समझ पाता था कि आप किस बारे में बात कर रहे हैं और उस हिसाब से सुझाव दे पाता था।
चौथा परमिशन था – कैलेंडर, कॉन्टैक्ट्स और फोटोज़। यानी COSMO आपकी डेट को एक्सेस कर सकता था – जैसे आपकी मीटिंग्स, आपके दोस्तों के नंबर, और आपकी गैलरी की तस्वीरें। इससे वह आपको याद दिला पाता था और पुरानी चीज़ें ढूंढ पाता था।
आपको बता दें – ये सारे परमिशन आप कभी भी रिवोक (वापस ले) सकते थे। यानी आपके हाथ में पूरा कंट्रोल था।
COSMO के धमाकेदार फीचर्स – एक-एक करके पूरी जानकारी
9to5Google की रिपोर्ट के अनुसार, COSMO में 14 स्किल्स थीं। आइए हर एक को विस्तार से समझते हैं:
पहला फीचर – लिस्ट ट्रैकर
यह आपकी बातचीत को सुनकर ऑटोमैटिकली Keep App में लिस्ट बना देता था। उदाहरण के तौर पर – आप कहते हैं “कल मुझे अंडे, दूध, ब्रेड, टमाटर और पनीर लाना है।” COSMO तुरंत कहेगा – “क्या आप चाहेंगे कि मैं Keep में एक शॉपिंग लिस्ट बना दूं?” आप हाँ कहें, और लिस्ट तैयार।
दूसरा फीचर – डॉक्युमेंट राइटर
अगर आपको कोई लेटर, नोट, ईमेल या सारांश बनाना है, तो COSMO डॉक्युमेंट बनाने का ऑफर देता था। जैसे आप कहते हैं – “मुझे अपने बॉस को एक ईमेल लिखना है कि मैं कल छुट्टी पर रहूँगा।” COSMO ड्राफ्ट तैयार कर देता। आप चाहें तो एडिट कर सकते थे।
तीसरा फीचर – कैलेंडर इवेंट सजेस्टर
जब आप किसी से मिलने का समय तय करते हैं, तो यह खुद कैलेंडर में इवेंट बुक करने का सुझाव देता था। जैसे – “कल शाम 7 बजे कैफे में मिलते हैं।” COSMO कहेगा – “क्या मैं आपके कैलेंडर में यह इवेंट जोड़ दूं?”
चौथा फीचर – ब्राउज़र एजेंट
यह Mariner नामक टेक्नोलॉजी का उपयोग करके वेब ब्राउज़िंग के काम ऑटोमेट करता था। जैसे – “मुझे गोवा के लिए सस्ती फ्लाइट्स चाहिए।” COSMO आपके लिए 5-6 वेबसाइट्स पर सर्च करके बेस्ट डील्स ले आता था।
पाँचवाँ फीचर – टाइमर ऐड करें
अगर आप कोई समयबद्ध काम कर रहे होते हैं, तो COSMO टाइमर लगाने का सुझाव देता था। जैसे – “मुझे 20 मिनट में केक निकालना है।” COSMO – “क्या मैं 20 मिनट का टाइमर लगा दूं?”
छठा फीचर – डीप रिसर्च
यह सबसे पावरफुल फीचर था। जब आपको किसी विषय पर मल्टीपल सोर्सेज़ से विस्तृत जानकारी चाहिए होती थी, तो COSMO पूरी रिसर्च करके एक रिपोर्ट जैसा जवाब देता था। उदाहरण के लिए – “मुझे भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के भविष्य पर डीटेल्ड रिपोर्ट चाहिए।” COSMO 10-15 सोर्सेज़ से डेटा इकट्ठा करता, स्टैट्स, ग्राफ और ट्रेंड्स के साथ एक पूरी रिपोर्ट बना देता।
सातवाँ फीचर – क्विक फोटो लुकअप
यह आपकी गैलरी में से कोई पुरानी तस्वीर ढूंढकर दिखा देता था – बिना आपको गैलरी ऐप खोलने की ज़रूरत के। जैसे – “वो तस्वीर दिखाओ जो मैंने पिछले साल गोवा में क्लिक की थी जिसमें मैंने नीली कमीज पहनी थी।” COSMO आपकी पूरी गैलरी स्कैन करके एक सेकंड में वो फोटो ढूंढ लाता।
आठवाँ फीचर – गूगल इट
अगर आपका कोई सवाल होता है जिसका जवाब सीधे वेब सर्च से मिल सकता है, तो COSMO खुद गूगल सर्च करके जवाब लाता था। जैसे – “प्रधानमंत्री का कार्यकाल कितने साल का होता है?” COSMO सर्च करता, विकिपीडिया से जवाब लाता, और पढ़कर सुनाता।
नौवाँ फीचर – जार्गन डेफिनिशन्स
अगर आपको कोई मुश्किल शब्द या टेक्निकल टर्म समझ नहीं आता, तो COSMO उसका सरल मतलब बता देता था। जैसे – “NFT क्या है?” COSMO समझाता – “NFT का मतलब Non-Fungible Token है। यह एक तरह की डिजिटल संपत्ति है। आसान भाषा में कहें तो – जैसे किसी पेंटिंग का डिजिटल सर्टिफिकेट।”
दसवाँ फीचर – प्रोवाइड इनसाइट
जब आप किसी विषय पर राय या नए आइडियाज़ ढूंढ रहे होते हैं, तो COSMO अपनी तरफ से इनसाइट्स और सुझाव देता था। जैसे – “मैं एक छोटा कैफे खोलना चाहता हूँ।” COSMO लोकेशन, बजट, टारगेट कस्टमर – सब कुछ ध्यान में रखकर 5-6 बिज़नेस आइडियाज़ बताता।
ग्यारहवाँ फीचर – पीपल अंडरस्टैंडिंग
यह आपके कॉन्टैक्ट्स के बारे में कॉन्टेक्स्ट समझता था। किसका जन्मदिन है, किसे क्या पसंद है, किससे आपने आखिरी बार कब बात की – सब। जैसे – “मेरी पत्नी को उसके जन्मदिन पर क्या गिफ्ट दूं?” COSMO – “पिछले साल उन्होंने किताबें और परफ्यूम पसंद किए थे।”
बारहवाँ फीचर – इवेंट अंडरस्टैंडिंग
यह त्योहारों, ऐतिहासिक घटनाओं, छुट्टियों – सबकी जानकारी रखता था। जैसे – “दिवाली कब है?” COSMO सही तारीख़ बताता। “26/11 अटैक क्या था?” COSMO उस घटना का संक्षिप्त और सही इतिहास बताता।
तेरहवाँ फीचर – रिकॉल
अगर आपको कुछ याद नहीं आ रहा – कोई नाम, जगह, चीज़ – तो यह आपके फोन में मौजूद डेटा (नोट्स, फोटोज, चैट्स, कैलेंडर) को खंगालकर याद दिलाता था। जैसे – “उस रेस्टोरेंट का नाम क्या था जहाँ हम पिछले महीने गए थे?” COSMO गूगल मैप्स हिस्ट्री, फोटोज और आपके चैट्स देखकर सही नाम बता देता।
चौदहवाँ फीचर – कन्वर्सेशन समरी
यह फीचर गेम-चेंजर था। जब आप लंबी बातचीत करते हैं (फोन पर, वॉट्सऐप पर, या COSMO से बात करते हुए) और आपको बीच में कोई और काम आ जाता है, तो जब आप वापस आते हैं, COSMO पिछली बातचीत का सारांश बना देता था। जैसे आप और COSMO 10 मिनट से “जापान ट्रिप” पर बात कर रहे थे। आप कहते हैं – “बाद में बात करेंगे।” जब वापस आते हैं, COSMO कहता – “हम डील, फ्लाइट और होटल पर बात कर रहे थे। मैंने तीन बेस्ट डील्स नोट कर ली हैं।”
इतने सारे फीचर्स – और ये सब आपके फोन के अंदर, बिना इंटरनेट के भी काम करते थे। यही वजह है कि COSMO ने सबको हैरान कर दिया।
COSMO की सेटिंग्स – Fulfillment Model क्या था?
9to5Google की रिपोर्ट के अनुसार, COSMO की सेटिंग्स में एक बेहद दिलचस्प मेनू था – Fulfillment Model। इसमें तीन ऑप्शन थे। आइए समझते हैं:
पहला ऑप्शन – Hybrid
यह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों का मिलाजुला इस्तेमाल करता था। जब आपके पास इंटरनेट होता, तो यह सर्वर से जवाब लेता – जो ज्यादा पावरफुल होता। जब इंटरनेट नहीं होता, तो यह लोकल AI (Gemini Nano) से काम चलाता। यानी हर हाल में COSMO काम करता रहता।
दूसरा ऑप्शन – PI Only
यह सिर्फ सर्वर-बेस्ड PI का इस्तेमाल करता था। PI का मतलब शायद “Personal Intelligence” या “Private Inference” है। लेकिन साफ बात यह थी – इस मोड में हर बार इंटरनेट कनेक्शन चाहिए था। बिना इंटरनेट के यह मोड काम नहीं करता था।
तीसरा ऑप्शन – Nano Only
यह सिर्फ लोकल Gemini Nano मॉडल का इस्तेमाल करता था। यह पूरी तरह ऑफलाइन काम करता था – बिना इंटरनेट के। लेकिन इसकी क्षमताएँ सीमित थीं। यह जटिल सवालों के जवाब नहीं दे सकता था, लेकिन बेसिक काम (जैसे अलार्म, मैसेज, नोट्स) जरूर कर सकता था।
अब सवाल – ‘PI’ क्या है? 9to5Google ने साफ तौर पर लिखा है कि यह पता नहीं चल पाया। लेकिन टेक एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि PI का मतलब “Personal Intelligence” या “Private Inference” हो सकता है। यानी यह क्लाउड-बेस्ड AI था, जबकि Nano ऑन-डिवाइस था।
क्या यह एक गलती से हुआ लॉन्च था? (9to5Google का अपडेट)
अब सबसे दिलचस्प हिस्सा। 9to5Google ने अपनी रिपोर्ट के शीर्ष पर एक अपडेट लिखा था। उसमें कहा गया था – “COSMO has since been removed from the Play Store. This was an accidental release after all.”
यानी – यह पूरी तरह आकस्मिक रिलीज़ थी। गलती से यह ऐप Play Store पर पब्लिश हो गया, और जब Google को पता चला, तो उन्होंने इसे तुरंत हटा दिया।
9to5Google ने आगे लिखा – “This feels like a premature, or accidental, release before Google I/O 2026 later this month. It’s not meant for consumers.”
यानी यह ऐप Google I/O 2026 से पहले गलती से लीक हो गया था। और यह कंज्यूमर्स के लिए नहीं था – यानी आम लोगों के इस्तेमाल के लिए नहीं बनाया गया था। यह सिर्फ Google के रिसर्च और टेस्टिंग के लिए था।
तो सवाल उठता है – क्या हम कभी COSMO इस्तेमाल कर पाएँगे? शायद हाँ, लेकिन अलग रूप में। संभावना है कि Google I/O 2026 में हम COSMO या उसके जैसा कोई ऑन-डिवाइस AI असिस्टेंट आधिकारिक रूप से देख सकते हैं।
COSMO और अन्य AI असिस्टेंट्स में क्या फर्क है?
बहुत से लोग पूछ रहे हैं – “हमारे पास पहले से Gemini और Google Assistant है, तो COSMO की क्या ज़रूरत थी?” यहाँ सरल भाषा में फर्क समझिए:
Google Assistant मुख्य रूप से वॉइस कमांड्स के लिए बना है – जैसे अलार्म लगाना, कॉल करना, मैसेज भेजना, गाना बजाना। यह बहुत अच्छा काम करता है, लेकिन इसकी समझ सीमित है। यह स्क्रीन नहीं देख सकता, न ही याद रख सकता है कि आपने कल क्या बात की थी। और यह बिना इंटरनेट के लगभग बेकार हो जाता है।
Gemini ऐप चैट और कंटेंट जेनरेशन के लिए बना है। यह सवालों के जवाब देता है, कहानियाँ लिखता है, रिसर्च कर सकता है, कोडिंग में मदद करता है। लेकिन यह पूरी तरह ऑनलाइन चलता है। बिना इंटरनेट के इसका कोई काम नहीं। और यह भी आपके फोन की स्क्रीन नहीं देख सकता।
लेकिन COSMO इन दोनों से आगे था। यह स्क्रीन देख सकता था और समझ सकता था कि आपके फोन पर क्या चल रहा है। यह आपकी पिछली बातचीत याद रख सकता था। यह एक साथ कई ऐप्स को मैनेज कर सकता था। और सबसे बड़ी बात – यह बिना इंटरनेट के भी काम कर सकता था।
टेक विशेषज्ञों के अनुसार, COSMO उस भविष्य की झलक था जहाँ AI सिर्फ आपकी बात नहीं सुनेगा, बल्कि आपकी स्क्रीन देखेगा, आपकी आदतें सीखेगा, और आपके लिए काम करेगा – बिना आपको कुछ करने को कहे।
क्या COSMO सुरक्षित था? प्राइवेसी कैसे हैंडल होती थी?
सबसे बड़ा सवाल – “इतनी पावर का मतलब था कि मेरी सारी निजी जानकारी Google के पास जाएगी?” आइए इसका सच समझते हैं।
9to5Google की रिपोर्ट के अनुसार, COSMO में दो तरह के मोड थे। पहला मोड – PI Only। इस मोड में सब कुछ सर्वर पर होता था, यानी आपका कुछ डेटा क्लाउड पर जाता था। दूसरा मोड – Nano Only। इस मोड में सब कुछ आपके फोन के अंदर ही होता था – बिना इंटरनेट के, बिना डेटा भेजे। आपको चुनना था कि किस मोड में रहना है।
इसके अलावा, COSMO में वॉइस मैच था – यानी सिर्फ आपकी आवाज़ पर ही एक्टिव होता था। अगर कोई और बोलता, तो वह रिस्पॉन्ड नहीं करता था। और सबसे अच्छी बात – आप कभी भी किसी परमिशन को रिवोक (वापस ले) सकते थे।
हालाँकि, क्योंकि यह एक एक्सपेरिमेंटल ऐप था, यह नहीं कहा जा सकता कि यह 100% सुरक्षित था। लेकिन Google Research के प्रोजेक्ट्स आमतौर पर प्राइवेसी को बहुत गंभीरता से लेते हैं।
हमें COSMO से क्या सीखने को मिलता है?
दोस्तों, COSMO भले ही हटा दिया गया हो, लेकिन इससे हमें Google की दिशा का अंदाजा हो जाता है। आइए चार बड़ी सीख लेते हैं:
पहली सीख – भविष्य ऑन-डिवाइस AI का है। बिना इंटरनेट के भी AI उतना ही ताकतवर होगा जितना आज क्लाउड पर है। इससे प्राइवेसी भी बेहतर होगी और स्पीड भी।
दूसरी सीख – स्क्रीन अंडरस्टैंडिंग अगला बड़ा कदम है। AI सिर्फ सुनना और पढ़ना नहीं, बल्कि देखना भी सीख रहा है। यानी वह समझ सकेगा कि आप क्या कर रहे हैं और उस हिसाब से मदद करेगा।
तीसरी सीख – प्राइवेसी और दमदार AI साथ चल सकते हैं। Nano Only मोड दिखाता है कि पूरी तरह ऑफलाइन भी AI काम कर सकता है – बिना आपका डेटा क्लाउड पर भेजे।
चौथी सीख – Google I/O 2026 में बड़ा ऐलान हो सकता है। COSMO की गलती से रिलीज़ शायद इसी का संकेत था। हो सकता है कि Google I/O में हम ऐसा ही कुछ आधिकारिक रूप से देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: क्या COSMO अभी डाउनलोड किया जा सकता है?
जवाब: नहीं। 9to5Google की रिपोर्ट के अनुसार, इसे Play Store से हटा दिया गया है। यह एक गलती से हुआ रिलीज़ था। अगर आपको कहीं इसकी APK मिल भी जाए, तो उसे इंस्टॉल न करें – क्योंकि यह असुरक्षित हो सकती है।
सवाल 2: क्या COSMO मुफ्त था?
जवाब: हाँ, जब यह Play Store पर था, तब यह पूरी तरह मुफ्त था। लेकिन यह एक एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट था, प्रोडक्ट नहीं।
सवाल 3: क्या COSMO iPhone पर आएगा?
जवाब: बहुत कम संभावना है, क्योंकि यह खासतौर पर Android और Google Research के लिए बनाया गया था।
सवाल 4: क्या COSMO हिंदी समझता था?
जवाब: 9to5Google की रिपोर्ट में इसका ज़िक्र नहीं है। लेकिन चूंकि Google के ज्यादातर AI प्रोजेक्ट मल्टीलिंगुअल होते हैं, तो संभावना है कि भविष्य के वर्जन में हिंदी सपोर्ट होगा।
सवाल 5: क्या मैं अब भी COSMO का इस्तेमाल कर सकता हूँ?
जवाब: नहीं। Google ने इसे हटा दिया है। कोई भी थर्ड-पार्टी जो COSMO नाम से ऐप दे रही है, वह नकली है – उससे बचें।
सवाल 6: क्या इसका मतलब है कि Google Assistant बंद हो जाएगा?
जवाब: बिल्कुल नहीं। COSMO सिर्फ एक रिसर्च प्रोजेक्ट है। Google Assistant अभी भी अरबों डिवाइसों पर काम कर रहा है।
सवाल 7: क्या COSMO के फीचर्स भविष्य में Gemini में आएंगे?
जवाब: बहुत संभावना है। COSMO एक टेस्ट बेड (प्रयोगशाला) था। इसके सफल फीचर्स को Gemini या Pixel फोन्स में शामिल किया जा सकता है।
निष्कर्ष
दोस्तों, जब मैंने पहली बार 9to5Google पर COSMO की खबर पढ़ी, तो मुझे लगा – ये तो वो AI है जिसका हम इंतज़ार कर रहे थे। एक ऐसा असिस्टेंट जो सिर्फ कमांड नहीं सुनता, बल्कि आपकी स्क्रीन देखता है, आपके पिछले काम याद रखता है, आपकी बातचीत समझता है, और बिना इंटरनेट के भी काम करता है।
हाँ, यह एक गलती से रिलीज़ हुआ एक्सपेरिमेंट था। हाँ, इसे हटा दिया गया। लेकिन इसने एक खिड़की खोल दी है – अब हम जान गए हैं कि Google किस दिशा में काम कर रहा है।
COSMO शायद कभी आम लोगों के फोन में न आए। लेकिन इसके फीचर्स – डीप रिसर्च, कन्वर्सेशन समरी, रिकॉल, स्क्रीन अंडरस्टैंडिंग – ये सब कल के Gemini या Pixel फोन्स का हिस्सा बन सकते हैं।
तो अगली बार जब आपका फोन आपकी बातचीत सुनकर लिस्ट बना दे, या आपकी पुरानी तस्वीर ढूंढकर दे दे, या बिना इंटरनेट के आपका सवाल समझ ले – तो याद रखना, यह सब उस छोटे से एक्सपेरिमेंट ‘COSMO’ से शुरू हुआ था।
और हाँ – यह लेख पूरी तरह 9to5Google की रिपोर्ट पर आधारित है। मैंने कहीं कोई फर्जी बात नहीं डाली है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।
स्रोत
यह लेख निम्नलिखित मूल रिपोर्ट पर आधारित है:
9to5Google – “Google releases experimental ‘COSMO’ AI assistant app on Play Store” by Abner Li (May 1, 2026)
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। COSMO ऐप वर्तमान में Google Play Store पर उपलब्ध नहीं है। यह एक गलती से हुआ एक्सपेरिमेंटल रिलीज़ था। Google का इस लेख से कोई संबंध नहीं है। सभी तथ्य 9to5Google की रिपोर्ट पर आधारित हैं, जो कि एक स्वतंत्र टेक पत्रकारिता स्रोत है। किसी भी तीसरे पक्ष के ऐप को ‘COSMO’ नाम से डाउनलोड न करें।



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